AM JAGO 【एम-जागो】
यक्ष-युधिष्ठिर संवादयुधिष्ठिर से जुए में समस्त सम्पत्ति तथा द्रौपदी आदि को जीत लेने के बाद 13 वर्ष के वनवास की शर्त रखी, जिसमें अंतिम वर्ष उन्हें अज्ञात रहते हुए गुजारना था। इसी दौरान एक दिन द्वैतवन में पाण्डवों के समीप आश्रम में एक तपस्वी ब्राह्मण रहता था, अग्निहोत्र के लिए इक्ट्ठी की हुई सभी लकड़ियां एक मृग अपने सिंगों में उलझाकर भाग जाता है। इस प्रकार ब्राह्मण के प्रार्थना करने पर युधिष्ठिर अपने भाईयों के साथ मृग की खोज में जंगल में दौड़े-दौड़े फिरते हैं, तब बहुत थक जाने-गला सूख जाने पर एक बरगद छाया में सुस्ताने लगे। तब युधिष्ठिर ने नुकुल को नजदीक के जलाशय से पानी लाने को कहा। तब उसके बहुत देर तक न लौटने पर बारी-बारी से सहदेव, अर्जुन तथा भीम को भेजा। बहुत देर पश्चात जब कोई भी लौटकर नहीं आया तब युधिष्ठिर स्वयं वहां पहुंचे और उन्होंने यक्ष के समस्त प्रश्नों के उत्तर देकर अन्ततः अपने भाईयों को जीवित भी कराया।